एक्यूप्रेशर क्या है ?

एक्यूप्रेशर अति प्राचीन एवं विशुद्ध भारतीय चिकित्सा पद्धति है इसका वर्णन हमें आयुर्वेद में भी मिलता है l आयुर्वेद ने इन एक्यू बिंदुओं को मर्म चिकित्सा बिंदु व एक्यूपंक्चर को शुचिभेदन के नाम से संबोधित किया है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अंग है, यदि उचित खानपान आहार बिहार का ध्यान रखते हुए नियमित एक्यूप्रेशर उपचार लिया जाए तो उपचार प्रबंध अधिक प्रभावी होते हैं l एक्यूप्रेशर चिकित्सा विज्ञान एक अथाह सागर है l जिसकी जितनी गहराई में जाने के प्रयास करते हैं उतने ही अधिक अनुभव प्राप्त होते हैं, किसी के लिए भी यह कह पाना संभव नहीं है कि उसे इस विधा का शत प्रतिशत ज्ञान प्राप्त है l
भारत एक विकासशील देश है यहां के बहुत से लोग धन की कमी के कारण अपने रोगों का उपचार कराने से वंचित रह जाते हैं या महंगा उपचार कराने के कारण उनके परिवार की आर्थिक व्यवस्था मैं असंतुलन होने से पूरे परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता है l कई वर्षों के कड़े परिश्रम के परिणाम स्वरूप हजारों लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर भारत के कोने कोने में इस पद्धति द्वारा लोगों को रोग मुक्त करना आरंभ किया है l यह भी दुखद विषय है कि अब से हजारों वर्ष पूर्व ऋषि मुनियों के भारत में ही इस विधा का जन्म हुआ परंतु उचित प्रचार-प्रसार के अभाव में भारतीय लोग इसका ज्यादा लाभ नहीं उठा पाए और यहां से पाश्चात्य देशों में जाकर इस पद्धति को फलने - फूलने के पर्याप्त अवसर मिले l वर्तमान में कई देशों में यह पद्धति अत्यधिक प्रचलन में है l

भारत देश में वर्तमान में भी एक्यूप्रेशर/ एक्यूपंक्चर के उचित प्रचार प्रसार का अभाव है l बहुत से लोगों को तो एक्यूप्रेशर/ एक्यूपंक्चर के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है और जिन्हें जानकारी है वह ऐसा सोचते हैं कि यह चिकित्सा पद्धति केवल सामान्य रोगों जैसे खांसी जुकाम, साधारण सर दर्द, हाथ पैर दर्द आदि के लिए कारगर है l बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि इस चिकित्सा पद्धति द्वारा साधारण ही नहीं अपितु असाधारण रोगों का उपचार भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है l आज के आधुनिक युग में अनुचित खानपान व दिनचर्या के कारण अधिकांश लोग किसी न किसी रोग से ग्रस्त हैं व किसी न किसी रूप में दवाओं का सेवन करते रहते हैं l हमारा उद्देश्य है कि लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा एक्यूप्रेशर/ एक्यूपंक्चर के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें बिना दवाओं के रोग मुक्त करने के प्रयास करें l
- First of all, it should be noted that acupressure treatment should not be taken immediately after eating, should be treated at least half an hour or half an hour later.
- Acupressure pressure points only bearable to bear.
- Women should not take treatment during menstrual cycle.
- Do not take acupressure treatment at home during pregnancy, take treatment only under the supervision of the Acupressure physician.
- Do not take a bath immediately after acupressure treatment, take bath before treatment.
- Use simple sketch pen for color therapy, not a permanent paints or markers.
- Operations, boils and other types of lesions should not be treated on the marks.
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